संदेश

इस्लाम में रमज़ान

 इस्लाम धर्म के पांच सिद्धांतों में तीसरा स्थान रमजान का आता है. इस्लामिक कैलेंडर के नवें महीने का नाम रमजान है. यह पूरा महीना बहुत ही मुबारक और रहमत वाला होता है.  इसमें सभी बालिग मर्द औरत सुबह सूरज निकलने से पहले से सूरज डूबने तक कुछ भी खाना पीना नहीं करते हैं और अपनी इंद्रियों को वश में करने का अभ्यास करते हैं. रोज़े की हालत में, झूठ बोलना, चोरी करना, किसी को दुःख पहुंचना ही नहीं, पति पत्नी भी संभोग से दूर रहते हैं. यह एक बहुत ही पवित्र और अनुशासन के पालन का महीना होता है. शाम को इफ्तार के समय सभी अपने अपने घरों में मिल कर एकसाथ रोज़ा खोलते हैं और एक अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं. इस महीने में दान और परोपकारिता को बढ़ चढ़ किया जाता है. इस महीने के अंतिम दस दिनों में इबादत ज्यादा की जाती है, अंतिम दस दिनों की 5 विशेष रातें इबादत की दृष्टि से रखी गयीं है जिनको शबेकदर कहा जाता है, इन्हीं 5 रातों में एक रात ऐसी होती है जिसकी इबादत हजार रातों से बेहतर होती है. 29 या 30 दिन के बाद (जब चाँद निकल आए) उसके अगले दिन ईद उल फितर का त्यौहार मनाया जाता है, जो मुसलमानों का सबसे बड़ा त्यौहा...

राहुल जी की भारत जोड़ो यात्रा की सार्थकता

" *भारत जोड़ो यात्रा " वास्तव में देश को  जोड़ने का काम कर रही है..*   राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा, (जो  कन्याकुमारी से कश्मीर तक जानी है )इस यात्रा को शुरू से ही दक्षिण भारत में शानदार सफलता मिली है.आगे  भी  इस यात्रा को  सभी जातियों और  वर्गों  का समर्थन मिल रहा है. इसके अलावा यात्रा के दौरान राहुल गांधी द्वारा जो विचार व्यक्त किए जा रहे हैं वो देश को  जोड़ने वाले और देश के स्वर्णिम भविष्य की दस्तक देने वाले प्रतीत हो रहे हैं. पिछले दिनों  राहुल गांधी ने दिल्ली पहुचने पर लाल किले से  जो बात कही वो सभी  जागरुक और देश से  लगाव रखने वालों को प्रभावित कर रही है कि देश में भाई चारा और  सद्भावना है, लेकिन  इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सरकार के इशारे पर बेमतलब में  नफरत और अलगाव को  बढ़ावा देने में लगी हुई है. जब कि देश को  इस समय अर्थव्यवस्था  मज़बूत करने और  महंगाई पर अंकुश लगाने की ज़रूरत है.  यह बात बिल्कुल सही है कि हमारे देश में सहिष्णुता और भाईचारे का बोलबाला पहले से रहा है, ...

आओ कुछ अच्छा काम करें

 " अपना जीवन लक्ष्य कैसे बनाएं "  मेरे प्रिय पाठकों,  यह खूबसूरत जिंदगी हमें एक मौका देती है कुछ अच्छा करने का, और अच्छा करने के लिए सबसे पहली जरूरत होती है, एक अच्छे माहौल की और एक अच्छी सोच की । जैसे- जैसे हमारी सोच परिपक्व होती जाती है वैसे ही हम साथी तलाश करने लगते हैं और उसी के अनुरूप ही हम काम करने लगते हैं। यह भी बात ठीक है कि हर अच्छे काम में रूकावटें भी बड़ी आती हैं, लेकिन वही रुकावटें या मुश्किलें हमारी कसौटी होती हैं। हमें हमारा आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति परखने के अवसर प्रदान करती हैं।      इसलिए हमें एक अच्छा जीवन जीने के लिए अपने जीवन के कुछ लक्ष्य निर्धारित करने होते हैं । वह लक्ष्य हमें मिलते हैं, अच्छी किताबें या साहित्य पढ़ने  से, अच्छी संगति में बैठने से  और माता पिता के द्वारा जो हमें अच्छे संस्कार मिलते हैं,वो भी हमारा जीवन लक्ष्य निर्धारित करने में सहायक होते है । लेकिन कभी-कभी हमें  से  अपने घर परिवार से वो सब कुछ नहीं मिलता जो साहित्य से या आदर्श पुरुषों की जीवनियाँ पढ़ने से मिल जाता है। तो हमें अपने जीवन का लक्ष्य ...

स्वार्थ और निस्वार्थ

मानवता  प्रकृति  द्वारा दिया गया एक वरदान है और एक  उपहार भी। क्योंकि मनुष्य जाति एक सामाजिक बंधनों से बंधा हुआ वर्ग है ,जो अपने साथ-साथ अपने संबंधियों ,पड़ोसियों और आसपास के लोगों के कल्याण के लिए काम करता है। हमारा किया हुआ प्रत्येक कार्य दूसरों पर प्रभाव डालता है और दूसरों के द्वारा किए गए कार्य हमारे ऊपर प्रभाव डालते है ।    इसलिए जैसे हम खुद हैं वैसा ही हमें समाज मिलता है ,वैसा ही हमारे साथ व्यवहार किया जाता है। इसलिए जिम्मेदारी यह बनती है कि हम वही कार्य करें जो हमें स्वयं के लिए पसंद है ।देखने में आता है कि हम अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए दूसरों के लिए काटे उत्पन्न करते हैं तो अपने लिए पुष्प मालाएं सजाते हैं ।जबकि हमें यह पता नहीं होताकि उन मालाओं के साथ साथ कांटे भी लगे होते हैं जो हम दूसरों के लिए बिछाने का प्रयास करता है । इसलिए जब भी हम जो भी कार्य करें वह दूसरों  को ध्यान में रखकर करें। दूसरों की भलाई में ही  हमारी भलाई निहित है । जो व्यक्ति जितना चतुर ,चालाक ,स्वार्थी और  कंजूस होता है उसको उसी प्रकार के लोग मिलते हैं जो व्यक्ति जितना क...

अद्भुत भारतीयता विश्व मे एक अलग पहचान रखती है। हम सभी को चाहिए कि इस सुंदरता और अखंडता को बनाए रखें बल्कि इसको और मजबूत करते रहें। डॉ ज़ुल्फ़िकार गुन्नौरी,अलीगढ़, उ प्र

भारत के त्यौहार                    भारत पर्वों का देश  हिंदुस्तान में जितने त्यौहार मनाए जाते हैं,शायद किसी और देश में मनाए जाते हों। हमारा देश विभिन्न धर्मों, जातियों, संस्कृतियों और वर्गों का देश है। यहाँ का हर दिन एक नए यौवन और ऊर्जा के साथ अवतरित होता है। विविधता इस देश की  आन -बान,  शान औऱ पहचान है।  यहाँ हर धर्म,सम्प्रदाय और वर्ग के लोग अपनी अपनी संस्कृति और सभ्यता के अनुसार तरह तरह के पर्वों और कार्यक्रमों का आयोजन बड़े ही तल्लीनता और हर्षोल्लास के साथ करते हैं। इन सभी आयोजनों और पर्वों में दूसरे वर्ग के लोग भी सम्मिलित होते हैं और उनकी आस्था का सम्मान करते हैं।   होली, हिन्दू धर्म का एक ऐसा ही पर्व है  इस त्यौहार में यहाँ का वातावरण रंगीन हो जाता है।चारो तरफ धूल धूम और धमाल मचा रहता है। बाजारों और मोहल्लों में लोग मस्ती से एक दूसरे के अबीर और गुलाल लगाते हैं। कपड़े रंगीन और चेहरे  पहचाने में दिक्कत हो जाती है। सबसे ज्यादा मौजमस्ती बच्चे और युवा करते हैं। नाच गाने के साथ देर रात में होलिका दहन किया...

आओ समाज के लिए कुछ करें।

जब हम जन्म लेते हैं उस समय हम बिल्कुल निःसहाय, निर्बल और अनुभवहीन होते हैं। हमारा एक एक पल एक एक काम दूसरों के सहारे सम्पन्न होता है।धीरे धीरे हमें समाज ही संस्कार और अनुभव देता है।एक एक कार्य को सिखाता है, आपसी भाईचारा सिखाता है। फिर हम भी सैम का साथ और काम करने योग्य हो जाते हैं।  इस लिए हमें समाज को अपना कुछ न कुछ ज़रूर देते रहना चाहिए।तभी हम और हमारा समाज बेहतर बन सकता है। जिस प्रकार बूंद बूंद से गागर भरता है ,ठीक उसी प्रकार एक एक व्यक्ति से समाज बनता है। हमारा हर काम समाज को अर्पित समर्पित होता है।

सफलता

इंसान अपनी जिंदगी में कुछ उद्देश्य, मकसद या लक्ष्य लेकर चलता है । उसके पीछे काम करती है ,उसकी इच्छा ,आकांक्षा और परिवेश का आकर्षण।  हमारा समाज वही पसंद करता है जो कम लोगों को प्राप्त होता है । जिसके लिए लोग मेहनत ज्यादा करते हैं और सफलता कम मिलती है। उदाहरण के लिए लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं ,जनप्रतिनिधि जैसे एमएलए ,एमपी ,एमएलसी, नगर निकायों के अध्यक्ष और सभासद । इसके साथ कुछ सरकारी पद और बड़े उद्योगों के मालिक या मैनेजर । इन सबके लिए बड़ी मेहनत ,लगन ,धन ,समय और ऊर्जा की आवश्यकता होती है । और सबसे बड़ी बात अनुशासन और ईमानदारी ।जिस व्यक्ति ने इन दो पहलुओं पर काम कर लिया ।अनुशासन ईमानदारी के साथ ,मेहनत का चौका लगा दिया । समझिए ऊपर बताई गई सभी बातें या स्थान ,पद प्राप्त करना बहुत सरल हो जाएगा जो कि एक मुश्किल काम है। क्योंकि व्यक्ति मेहनती भले ही हो जाए लेकिन अनुशासन और इमानदारी हर किसी के बस की बात नहीं । जिसने इन गुणों को सीख लिया ,समझिए सफलता उसके कदम चूमती है।