अद्भुत भारतीयता विश्व मे एक अलग पहचान रखती है। हम सभी को चाहिए कि इस सुंदरता और अखंडता को बनाए रखें बल्कि इसको और मजबूत करते रहें। डॉ ज़ुल्फ़िकार गुन्नौरी,अलीगढ़, उ प्र
भारत के त्यौहार भारत पर्वों का देश
हिंदुस्तान में जितने त्यौहार मनाए जाते हैं,शायद किसी और देश में मनाए जाते हों। हमारा देश विभिन्न धर्मों, जातियों, संस्कृतियों और वर्गों का देश है। यहाँ का हर दिन एक नए यौवन और ऊर्जा के साथ अवतरित होता है। विविधता इस देश की आन -बान, शान औऱ पहचान है। यहाँ हर धर्म,सम्प्रदाय और वर्ग के लोग अपनी अपनी संस्कृति और सभ्यता के अनुसार तरह तरह के पर्वों और कार्यक्रमों का आयोजन बड़े ही तल्लीनता और हर्षोल्लास के साथ करते हैं। इन सभी आयोजनों और पर्वों में दूसरे वर्ग के लोग भी सम्मिलित होते हैं और उनकी आस्था का सम्मान करते हैं।
होली, हिन्दू धर्म का एक ऐसा ही पर्व है इस त्यौहार में यहाँ का वातावरण रंगीन हो जाता है।चारो तरफ धूल धूम और धमाल मचा रहता है। बाजारों और मोहल्लों में लोग मस्ती से एक दूसरे के अबीर और गुलाल लगाते हैं। कपड़े रंगीन और चेहरे पहचाने में दिक्कत हो जाती है। सबसे ज्यादा मौजमस्ती बच्चे और युवा करते हैं। नाच गाने के साथ देर रात में होलिका दहन किया जाता है। अगले दिन सुबह से ही एक दूसरे के रंग लगाने का चलन होता है। शाम को नहा धो कर लोग एक दूसरे को होली की बधाई देते हैं और खोए की गुजियाँ, मिठाइयां और नमकीन खाते औऱ खिलाते हैं। कुछ लोग मद्यपान और तरह तरह का आयोजन भी करते हैं। इस तरह इस मस्ती के पर्व का समापन हो जाता है। दशहरा,दीपावली, रामनवमी, रक्षाबन्धन, करवाचौथ भी हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण पर्व हैं। जिनके अलग अलग रंग देखने को मिलते हैं। करवाचौथ में जहाँ पतियों की लंबी उम्र के व्रत रखा जाता है वहीं रक्षा बंधन बहिनों - भाईयों का प्यार दर्शाता है।
इसी तरह मुसलमान भाई रामज़ान के पूरे महीने रोज़े रखते हैं यानी सुबह सूर्योदय से पहले से लेकर सूर्यास्त तक कुछ भी न खाते है न पीते हैं और सात्विक जीवन जीते हैं । इफ्तार ( सूर्यास्त के समय) फल, जूस,शर्बत और खाने के साथ रोज़ खोलते हैं। सच्चाई,अहिंसा और ईमानदारी का पालन करते हैं इसके अलावा रात को एक अल्लाह की इबादत भी करते हैं।इसी तरह रमज़ान का एक महिने का अंत ईद के चांद के साथ होता है, जिसके अगले दिन ईद मनाई जाती है। सभी लोग नए नए कपड़े पहन कर ईदगाह जाकर ईद की नमाज़ अदा करते हैं। मुंशी प्रेमचंद ने अपनी प्रसिद्ध कहानी ईदगाह में इस पर्व का बहुत ही अच्छा वर्णन है। इसके बाद एकदूसरे को ईद की मुबारकबाद दी जाती है और सिवईयां , बिरयानी, नमकीन पकवान व मिठाइयां खिलाते हैं।बच्चों को ईदी अर्थात लोग उपहार व रुपये देते हैं। इसी तरह ईसाई लोग क्रिसमस का पर्व बड़ी धूमधन से मनाते हैं। जिसमे अपने घर और चर्च को सजाते हैं और रोशनी करते हैं।बच्चों को सेंताकलास उपहार बांटते हैं। आपस मे लोग एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। इस तरह हमारे देश में तरह तरह के त्यौहार मनाए जाते हैं जिससे आपसी सौहार्द और भाईचारे को बल मिलता है। यही अद्भुत भारतीयता विश्व मे एक अलग पहचान रखती है। हम सभी को चाहिए कि इस सुंदरता और अखंडता को बनाए रखें बल्कि इसको और मजबूत करते रहें।
डॉ.ज़ुल्फ़िकार गुन्नौरी
अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
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