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स्वार्थ और निस्वार्थ

मानवता  प्रकृति  द्वारा दिया गया एक वरदान है और एक  उपहार भी। क्योंकि मनुष्य जाति एक सामाजिक बंधनों से बंधा हुआ वर्ग है ,जो अपने साथ-साथ अपने संबंधियों ,पड़ोसियों और आसपास के लोगों के कल्याण के लिए काम करता है। हमारा किया हुआ प्रत्येक कार्य दूसरों पर प्रभाव डालता है और दूसरों के द्वारा किए गए कार्य हमारे ऊपर प्रभाव डालते है ।    इसलिए जैसे हम खुद हैं वैसा ही हमें समाज मिलता है ,वैसा ही हमारे साथ व्यवहार किया जाता है। इसलिए जिम्मेदारी यह बनती है कि हम वही कार्य करें जो हमें स्वयं के लिए पसंद है ।देखने में आता है कि हम अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए दूसरों के लिए काटे उत्पन्न करते हैं तो अपने लिए पुष्प मालाएं सजाते हैं ।जबकि हमें यह पता नहीं होताकि उन मालाओं के साथ साथ कांटे भी लगे होते हैं जो हम दूसरों के लिए बिछाने का प्रयास करता है । इसलिए जब भी हम जो भी कार्य करें वह दूसरों  को ध्यान में रखकर करें। दूसरों की भलाई में ही  हमारी भलाई निहित है । जो व्यक्ति जितना चतुर ,चालाक ,स्वार्थी और  कंजूस होता है उसको उसी प्रकार के लोग मिलते हैं जो व्यक्ति जितना क...

अद्भुत भारतीयता विश्व मे एक अलग पहचान रखती है। हम सभी को चाहिए कि इस सुंदरता और अखंडता को बनाए रखें बल्कि इसको और मजबूत करते रहें। डॉ ज़ुल्फ़िकार गुन्नौरी,अलीगढ़, उ प्र

भारत के त्यौहार                    भारत पर्वों का देश  हिंदुस्तान में जितने त्यौहार मनाए जाते हैं,शायद किसी और देश में मनाए जाते हों। हमारा देश विभिन्न धर्मों, जातियों, संस्कृतियों और वर्गों का देश है। यहाँ का हर दिन एक नए यौवन और ऊर्जा के साथ अवतरित होता है। विविधता इस देश की  आन -बान,  शान औऱ पहचान है।  यहाँ हर धर्म,सम्प्रदाय और वर्ग के लोग अपनी अपनी संस्कृति और सभ्यता के अनुसार तरह तरह के पर्वों और कार्यक्रमों का आयोजन बड़े ही तल्लीनता और हर्षोल्लास के साथ करते हैं। इन सभी आयोजनों और पर्वों में दूसरे वर्ग के लोग भी सम्मिलित होते हैं और उनकी आस्था का सम्मान करते हैं।   होली, हिन्दू धर्म का एक ऐसा ही पर्व है  इस त्यौहार में यहाँ का वातावरण रंगीन हो जाता है।चारो तरफ धूल धूम और धमाल मचा रहता है। बाजारों और मोहल्लों में लोग मस्ती से एक दूसरे के अबीर और गुलाल लगाते हैं। कपड़े रंगीन और चेहरे  पहचाने में दिक्कत हो जाती है। सबसे ज्यादा मौजमस्ती बच्चे और युवा करते हैं। नाच गाने के साथ देर रात में होलिका दहन किया...

आओ समाज के लिए कुछ करें।

जब हम जन्म लेते हैं उस समय हम बिल्कुल निःसहाय, निर्बल और अनुभवहीन होते हैं। हमारा एक एक पल एक एक काम दूसरों के सहारे सम्पन्न होता है।धीरे धीरे हमें समाज ही संस्कार और अनुभव देता है।एक एक कार्य को सिखाता है, आपसी भाईचारा सिखाता है। फिर हम भी सैम का साथ और काम करने योग्य हो जाते हैं।  इस लिए हमें समाज को अपना कुछ न कुछ ज़रूर देते रहना चाहिए।तभी हम और हमारा समाज बेहतर बन सकता है। जिस प्रकार बूंद बूंद से गागर भरता है ,ठीक उसी प्रकार एक एक व्यक्ति से समाज बनता है। हमारा हर काम समाज को अर्पित समर्पित होता है।

सफलता

इंसान अपनी जिंदगी में कुछ उद्देश्य, मकसद या लक्ष्य लेकर चलता है । उसके पीछे काम करती है ,उसकी इच्छा ,आकांक्षा और परिवेश का आकर्षण।  हमारा समाज वही पसंद करता है जो कम लोगों को प्राप्त होता है । जिसके लिए लोग मेहनत ज्यादा करते हैं और सफलता कम मिलती है। उदाहरण के लिए लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं ,जनप्रतिनिधि जैसे एमएलए ,एमपी ,एमएलसी, नगर निकायों के अध्यक्ष और सभासद । इसके साथ कुछ सरकारी पद और बड़े उद्योगों के मालिक या मैनेजर । इन सबके लिए बड़ी मेहनत ,लगन ,धन ,समय और ऊर्जा की आवश्यकता होती है । और सबसे बड़ी बात अनुशासन और ईमानदारी ।जिस व्यक्ति ने इन दो पहलुओं पर काम कर लिया ।अनुशासन ईमानदारी के साथ ,मेहनत का चौका लगा दिया । समझिए ऊपर बताई गई सभी बातें या स्थान ,पद प्राप्त करना बहुत सरल हो जाएगा जो कि एक मुश्किल काम है। क्योंकि व्यक्ति मेहनती भले ही हो जाए लेकिन अनुशासन और इमानदारी हर किसी के बस की बात नहीं । जिसने इन गुणों को सीख लिया ,समझिए सफलता उसके कदम चूमती है।