आओ समाज के लिए कुछ करें।
जब हम जन्म लेते हैं उस समय हम बिल्कुल निःसहाय, निर्बल और अनुभवहीन होते हैं। हमारा एक एक पल एक एक काम दूसरों के सहारे सम्पन्न होता है।धीरे धीरे हमें समाज ही संस्कार और अनुभव देता है।एक एक कार्य को सिखाता है, आपसी भाईचारा सिखाता है। फिर हम भी सैम का साथ और काम करने योग्य हो जाते हैं।
इस लिए हमें समाज को अपना कुछ न कुछ ज़रूर देते रहना चाहिए।तभी हम और हमारा समाज बेहतर बन सकता है। जिस प्रकार बूंद बूंद से गागर भरता है ,ठीक उसी प्रकार एक एक व्यक्ति से समाज बनता है। हमारा हर काम समाज को अर्पित समर्पित होता है।
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